IIT मुंबई के साहिल वाकोडे आत्महत्या मामले में प्रोफेसर के खिलाफ FIR, तीन महीने तक जातीय गाली-गलौज और प्रताड़ना का आरोप

 

आईआईटी (IIT) मुंबई के छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की आत्महत्या के मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डल्ला के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। साहिल के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को करीब तीन महीने तक प्रताड़ित किया गया और उसके साथ जातिसूचक गाली-गलौज की गई।

शिकायत में साहिल के पिता ने IIT मुंबई के निदेशक श्रीशिष बी. केदारे के साथ कई प्रोफेसरों और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी लिए हैं। शिकायत के मुताबिक, साहिल को निदेशक के कथित निर्देश पर प्रताड़ित किया गया। पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मुंबई क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है।

22 वर्षीय साहिल ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक द्वितीय वर्ष का छात्र था। 18 सितंबर की शाम वह IIT मुंबई के हॉस्टल नंबर-4 स्थित अपने कमरे में मृत पाया गया। पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

यह IIT मुंबई में पिछले सात महीनों के दौरान आत्महत्या की तीसरी घटना बताई जा रही है। वहीं, इस साल सितंबर तक देशभर के IIT में नौ छात्रों की आत्महत्या की जानकारी सामने आई है।

IIT मुंबई के मुताबिक, साहिल परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। संस्थान का दावा है कि उसने परीक्षा का प्रश्नपत्र चैटजीपीटी पर अपलोड कर उसके जवाब हासिल करने की कोशिश की थी।

IIT के अनुसार, साहिल के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। प्रशिक्षक और विभागाध्यक्ष ने उससे बातचीत की और उसकी काउंसलिंग की गई। उसे यह भी आश्वासन दिया गया था कि इस घटना का उसके शैक्षणिक करियर पर असर नहीं पड़ेगा।

इसके बाद साहिल दोपहर करीब चार बजे हॉस्टल लौट आया। देर रात उसका शव हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका मिला।

साहिल की मौत के बाद IIT संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। ग्लोबल IIT एलुमनी सपोर्ट ग्रुप के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में 160 IIT छात्रों ने आत्महत्या की है। इनमें से करीब 43 प्रतिशत मामले पिछले पांच वर्षों में सामने आए।

समूह के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में सबसे ज्यादा 16 आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जबकि 2026 में सितंबर तक नौ मामले सामने आ चुके हैं।

सर्वेक्षण में शामिल IIT छात्रों में 10 में से छह से अधिक ने शैक्षणिक दबाव को आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण बताया। एलुमनी सपोर्ट ग्रुप के अनुसार, परीक्षाओं के दौरान छात्रों में आत्महत्या की घटनाएं अधिक सामने आती हैं।

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